रविवार, 26 जनवरी 2020

Shrimad Bhagwat Geeta

तान्समीक्ष्य स कौन्तेयः सर्वान्‌ बन्धूनवस्थितान्‌॥
 कृपया परयाविष्टो विषीदत्रिदमब्रवीत्‌।

उन उपस्थित सम्पूर्ण बंधुओं को देखकर वे कुंतीपुत्र अर्जुन अत्यन्त करुणा से युक्त होकर शोक करते हुए यह वचन बोले। 
 ॥27वें का उत्तरार्ध और 28वें का पूर्वार्ध॥

~ श्लोक 27 - अध्याय 1

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