सोमवार, 20 जनवरी 2020

shrimad bhagwat Geeta

(अर्जुन द्वारा सेना-निरीक्षण का प्रसंग)
 अथ व्यवस्थितान्दृष्ट्वा धार्तराष्ट्रान्‌ कपिध्वजः।
 प्रवृत्ते शस्त्रसम्पाते धनुरुद्यम्य पाण्डवः॥ 
 हृषीकेशं तदा वाक्यमिदमाह महीपते। 
 
 अर्जुन उवाचः 
 सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत॥

हे राजन्‌! इसके बाद कपिध्वज अर्जुन ने मोर्चा बाँधकर डटे हुए धृतराष्ट्र-संबंधियों को देखकर, उस शस्त्र चलने की तैयारी के समय धनुष उठाकर हृषीकेश श्रीकृष्ण महाराज से यह वचन कहा- हे अच्युत! मेरे रथ को दोनों सेनाओं के बीच में खड़ा कीजिए
 ॥20-21॥

~ श्लोक 20, 21 - अध्याय 1 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें