मंगलवार, 21 जनवरी 2020

shrimad bhagwat Geeta

यावदेतान्निरीक्षेऽहं योद्धुकामानवस्थितान्‌।
 कैर्मया सह योद्धव्यमस्मिन् रणसमुद्यमे॥

और जब तक कि मैं युद्ध क्षेत्र में डटे हुए युद्ध के अभिलाषी इन विपक्षी योद्धाओं को भली प्रकार देख न लूँ कि इस युद्ध रूप व्यापार में मुझे किन-किन के साथ युद्ध करना योग्य है, तब तक उसे खड़ा रखिए
 ॥22॥

~ श्लोक 22 - अध्याय 1

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