सोमवार, 30 दिसंबर 2019
shrimad bhagwat Geeta
शनिवार, 28 दिसंबर 2019
Agree Madbhagwat gita
शुक्रवार, 27 दिसंबर 2019
Shrimad bhagwat Geeta
संजय उवाच दृष्टवा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा। आचार्यमुपसंगम्य राजा वचनमब्रवीत्॥
संजय बोले- उस समय राजा दुर्योधन ने व्यूहरचनायुक्त पाण्डवों की सेना को देखा और द्रोणाचार्य के पास जाकर यह वचन कहा ॥2॥ ~ श्लोक 2 - अध्याय 1
गुरुवार, 26 दिसंबर 2019
Shrimad bhagwat Geeta
धृतराष्ट्र उवाच धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः। मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय॥ धृतराष्ट्र बोले-
हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में एकत्रित, युद्ध की इच्छावाले मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया? ॥1॥ ~ श्लोक 1 - अध्याय 1
रविवार, 22 दिसंबर 2019
श्रीमद्भागवत गीता
शनिवार, 21 दिसंबर 2019
श्रीमद्भागवत गीता
शुक्रवार, 20 दिसंबर 2019
श्रीमद्भागवत गीता
गुरुवार, 19 दिसंबर 2019
Shrimad bhagwat Geeta
बुधवार, 18 दिसंबर 2019
श्रीमद्भागवत गीता
मंगलवार, 17 दिसंबर 2019
श्रीमद्भागवत गीता
सोमवार, 16 दिसंबर 2019
श्रीमद्भागवत गीता
शुक्रवार, 13 दिसंबर 2019
श्रीमद्भागवत गीता
गुरुवार, 12 दिसंबर 2019
श्रीमद्भागवत गीता
बुधवार, 11 दिसंबर 2019
श्रीमद्भगवद्गीता
मंगलवार, 10 दिसंबर 2019
श्रीमद्भगवद्गीता
सोमवार, 9 दिसंबर 2019
श्रीमद्भागवत गीता
रविवार, 8 दिसंबर 2019
श्रीमद्भगवद्गीता
शनिवार, 7 दिसंबर 2019
श्रीमद्भागवभागवत गीता
शुक्रवार, 6 दिसंबर 2019
श्रीमद्भागवत गीता
गुरुवार, 5 दिसंबर 2019
श्रीमद्भागवत गीता
बुधवार, 4 दिसंबर 2019
श्रीमद्भागवत गीता
मंगलवार, 3 दिसंबर 2019
श्रीमद्भागवत गीता
सोमवार, 2 दिसंबर 2019
श्रीमद्भागवत गीता
रविवार, 1 दिसंबर 2019
श्रीमद्भागवत गीता
शुक्रवार, 29 नवंबर 2019
श्रीमद्भागवत गीता
गुरुवार, 28 नवंबर 2019
श्रीमद्भागवत गीता
बुधवार, 27 नवंबर 2019
श्रीमद्भागवत गीता
मंगलवार, 26 नवंबर 2019
श्रीमद्भागवत गीता
सोमवार, 25 नवंबर 2019
श्रीमद्भागवत गीता
रविवार, 24 नवंबर 2019
श्रीमद्भागवत गीता
शनिवार, 23 नवंबर 2019
सामाजिक विषमता
विवाह की बढ़ती उम्र पर खामोशी क्यों...?
28-32 साल की युवक युवतियां बैठे है कुंवारे, फिर मौन क्यों हैं समाज के कर्ता-धर्ता
कुंवारे बैठे लड़के लड़कियों की एक गंभीर समस्या आज सामान्य रुप से सभी समाजों में उभर के सामने आ रही है। इसमें उम्र तो एक कारण है ही मगर समस्या अब इससे भी कहीं आगे बढ़ गई है। क्योंकि 30 से 35 साल तक की लड़कियां भी कुंवारी बैठी हुई है। इससे स्पष्ट है कि इस समस्या का उम्र ही एकमात्र कारण नहीं बचा है। ऐसे में लड़के लड़कियों के जवां होते सपनों पर न तो किसी समाज के कर्ता-धर्ताओं की नजर है और न ही किसी रिश्तेदार और सगे संबंधियों की। हमारी सोच कि हमें क्या मतलब है में उलझ कर रह गई है। बेशक यह सच किसी को कड़वा लग सकता है लेकिन हर समाज की हकीकत यही है, 25 वर्ष के बाद लड़कियां ससुराल के माहौल में ढल नहीं पाती है, क्योंकि उनकी आदतें पक्की और मजबूत हो जाती हैं अब उन्हें मोड़ा या झुकाया नहीं जा सकता जिस कारण घर में बहस, वाद विवाद, तलाक होता हैं बच्चे सिजेरियन ऑपरेशन से होते हैं जिस कारण बाद में बहुत सी बिमारी का सामना करना पड़ता है ।
शादी के लिए लड़की की उम्र 18 साल व लड़के की उम्र 21 साल होनी चाहिए ये तो अब बस आंकड़ों में ही रह गया है। एक समय था जब संयुक्त परिवार के चलते सभी परिजन अपने ही किसी रिश्तेदार व परिचितों से शादी संबंध बालिग होते ही करा देते थे। मगर बढ़ते एकल परिवारों ने इस परेशानी को और गंभीर बना दिया है। अब तो स्थिति ऐसी हो गई है कि एकल परिवार प्रथा ने आपसी प्रेम व्यवहार ही खत्म सा कर दिया है। अब तो शादी के लिए जांच पड़ताल में और कोई तो नेगेटिव करें या न करें अपनी ही खास सगे संबंधी नेगेटिव कर बनते संबंध खराब कर देते है।
उच्च शिक्षा और हाई जॉब बढ़ा रही उम्र
यूं तो शिक्षा शुरू से ही मूल आवश्यकता रही है लेकिन पिछले डेढ़ दो दशक से इसका स्थान उच्च शिक्षा या कहे कि खाने कमाने वाली डिग्री ने ले लिया है। इसकी पूर्ति के लिए अमूमन लड़के की उम्र 23-24 या अधिक हो जाती है। इसके दो-तीन साल तक जॉब करते रहने या बिजनेस करते रहने पर उसके संबंध की बात आती है। जाहिर से इतना होते-होते लड़के की उम्र तकरीबन 30 के इर्द -गिर्द हो जाती है। इतने तक रिश्ता हो गया तो ठीक, नहीं तो लोगों की नजर तक बदल जाती है। यानि 50 सवाल खड़े हो जाते है।
चिंता देता है उम्र का यह पड़ाव
प्रकृति के हिसाब से 30 प्लस का पड़ाव चिंता देने वाला है। न केवल लड़के-लड़की को बल्कि उसके माता-पिता, भाई-बहन, घर-परिवार और सगे संबंधियों को भी। सभी तरफ से प्रयास भी किए, बात भी जंच गई लेकिन हर संभव कोशिश के बाद भी रिश्ता न बैठने पर उनकी चिंता और बढ़ जाती है। इतना ही नहीं, शंका-समाधान के लिए मंदिरों तक गए, पूजा-पाठ भी कराए, नामी विशेषज्ञों ने जो बताए वे तमाम उपाय भी कर लिए पर बात नहीं बनी। मेट्रीमोनी वेबसाइट्स व वाट्सअप पर चलते बायोडेटा की गणित इसमें कारगार होते नहीं दिखाई देते। बिना किसी मीडिएटर के संबंध होना मुश्किल ही होता है। मगर कोई मीडिएटर बनना चाहता ही नहीं है। मगर इन्हें कौन समझाए की जब हम किसी के मीडिएटर नहीं बनेंगे तो हमारा भी कोई नहीं बनेगा। एक समस्या ये भी हम पैदा करते जा रहे है कि हम सामाजिक न होकर एकांतवादी बनते जा रहे है।
आखिर कहां जाए युवा मन
अपने मन को समझाते-बुझाते युवा आखिर कब तक भाग्य भरोसे रहेगा। अपनों से तिरस्कृत और मन से परेशान युवा सब कुछ होते हुए भी अपने को ठगा सा महसूस करता है। हद तो तब हो जाती है जब किसी समारोह में सब मिलते हैं और एक दूसरे से घुल मिलकर बात करते हैं लेकिन उस वक्त उस युवा पर क्या बीतती है, यह वही जानता है। ऐसे में कई बार नहीं चाहते हुए भी वह उधर कदम बढ़ाने को मजबूर हो जाता है जहां शायद कोई सभ्य पुरूष जाने की भी नहीं सोचता या फिर ऐसी संगत में बैठता है जो बदनाम ही करती हो।
ख्वाहिशें अपार, अरमान हजार
हर लड़की और उसके पिता की ख्वाहिश से आप और हम अच्छी तरह परिचित हैं। पुत्री के बनने वाले जीवनसाथी का खुद का घर हो, कार हो, परिवार की जिम्मेदारी न हो, घूमने-फिरने और आज से युग के हिसाब से शौक रखता हो और कमाई इतनी तगड़ी हो कि सारे सपने पूरे हो जाएं, तो ही बात बन सकती है। हालांकि सभी की अरमान ऐसे नहीं होते लेकिन चाहत सबकी यही है। शायद हर लड़की वाला यह नहीं सोचता कि उसका भी लड़का है तो क्या मेरा पुत्र किसी ओर के लिए यह सब पूरा करने में सक्षम है। यानि एक गरीब बाप भी अपनी बेटी की शादी एक अमीर लड़के से करना चाहता है और अमीर लड़की का बाप तो अमीर से करेगा ही। ऐसे में सामान्य परिवार के लड़के का क्या होगा? यह एक चिंतनीय विषय सभी के सामने आ खड़ा हुआ है। संबंध करते वक्त एक दूसरे का व्यक्तिव व परिवार देखना चाहिए ना कि पैसा। कई ऐसे रिश्ते भी हमारे सामने है कि जब शादी की तो लड़का आर्थिक रूप से सामान्य ही था मगर शादी बाद वह आर्थिक रूप से बहुत मजबूत हो गया। ऐसे भी मामले सामने आते है कि शादी के वक्त लड़का बहुत अमीर था और अब स्थिति सामान्य रह गई। इसलिए लक्ष्मी तो आती जाती है ये तो नसीबों का खेल मात्र है।
क्यों नहीं सोचता समाज
समाजसेवा करने वाले लोग आज अपना नाम कमाने के लिए लाखों रुपए खर्च करने से नहीं चूकते लेकिन बिडम्बना है कि हर समाज में बढ़ रही युवाओं की विवाह की उम्र पर कोई चर्चा करने की व इस पर कार्य योजना बनाने की फुर्सत किसी को नहीं है। कहने को हर समाज की अनेक संस्थाएं हैं वे भी इस गहन बिन्दु पर चिंतित नजर नहीं आती।
पहल तो करें
हो सकता है इस मुद्दे पर समाज में पहले कभी चर्चा हुई हो लेकिन उसका ठोस समाधान अभी नजर नहीं आता। तो क्यों नहीं बीड़ा उठाएं कि एक मंच पर आकर ऐसे लड़कों व लड़कियों को लाएं जो बढ़ती उम्र में हैं और समझाइश से उनका रिश्ता कहीं करवाने की पहल करें। यह प्रयास छोटे स्तर से ही शुरू हो। रोशन भारत का हर समाज के नेतृत्वकर्ताओं से अनुरोध है कि वे इस गंभीर समस्या पर चर्चा करें और एक ऐसा रास्ता तैयार करें जो युवाओं को भटकाव के रास्ते से रोककर विकास के मार्ग पर ले जा सकें। स्वार्थ न समझकर परोपकार समझ कर सहयोग करें।
शुक्रवार, 22 नवंबर 2019
श्रीमद् भागवत गीता
बुधवार, 20 नवंबर 2019
श्रीमद्भागवत गीता
मंगलवार, 19 नवंबर 2019
श्रीमद्भागवत गीता
शनिवार, 23 फ़रवरी 2019
हमारे जीवन का मकसद क्या है।
जीवन एक आनंद पूर्ण यात्रा हैं।हम शिक्षा ग्रहण करें। अपने काम करें वह सब कुछ करें जो जीवन यापन के लिए आवश्यक हैं।
लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है कि हम जीवन को जिये हम वो जरूर करें जो हमें अच्छा लगते हैं। कुछ समय हमारा खुद का हो खुली हवा हो खुला आसमान हो पक्षियों का शोर हो हवा की सरसराहट हो मन में अच्छे विचार शांति का संचार हो एक अलग ही दुनिया हो जिसके हम शहंशाह हो। जीवन में क्या प्राप्त किया यह सोचने की बजाय यह सोचे कि इस राह में हमें क्या-क्या अच्छा मिला। वो अच्छे लोग जिनके साथ बात करते करते हम कई घंटों का समय बिता दिया करते थे वह अच्छी जगह जहां हमें बार-बार जाना अच्छा लगता है ऐसी अनेक चीजें हैं जो हमें अच्छी लगती है वह हम जरूर करें चाहे साल में करें महीने मे करें हफ्ते में करें या दिन में करें लेकिन वह सभी कार्य हम जरूर करे,अच्छा लगता है।