शुक्रवार, 29 नवंबर 2019

श्रीमद्भागवत गीता

यनेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवातो न विद्यते। स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात्‌॥ इस कर्मयोग में आरंभ का अर्थात बीज का नाश नहीं है और उलटा फलरूप दोष भी नहीं है, बल्कि इस कर्मयोग रूप धर्म का थोड़ा-सा भी साधन जन्म-मृत्यु रूप महान भय से रक्षा कर लेता है ॥40॥ ~ श्लोक 40 - अध्याय 2

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