गुरुवार, 12 दिसंबर 2019

श्रीमद्भागवत गीता

( स्थिरबुद्धि पुरुष के लक्षण और उसकी महिमा ) अर्जुन उवाच स्थितप्रज्ञस्य का भाषा समाधिस्थस्य केशव। स्थितधीः किं प्रभाषेत किमासीत व्रजेत किम्‌॥ अर्जुन बोले- हे केशव! समाधि में स्थित परमात्मा को प्राप्त हुए स्थिरबुद्धि पुरुष का क्या लक्षण है? वह स्थिरबुद्धि पुरुष कैसे बोलता है, कैसे बैठता है और कैसे चलता है? ॥54॥ ~ श्लोक 54 - अध्याय 2

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