बुधवार, 29 जनवरी 2020

मद्भागवत गीता

निमित्तानि च पश्यामि विपरीतानि केशव।
 न च श्रेयोऽनुपश्यामि हत्वा स्वजनमाहवे॥

हे केशव! मैं लक्षणों को भी विपरीत ही देख रहा हूँ तथा युद्ध में स्वजन-समुदाय को मारकर कल्याण भी नहीं देखता
 ॥31॥

~ श्लोक 31 - अध्याय 1

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