रविवार, 7 फ़रवरी 2021

श्रीमद्भागवत गीता

जितात्मनः प्रशान्तस्य परमात्मा समाहितः।

 शीतोष्णसुखदुःखेषु तथा मानापमानयोः॥


सरदी-गरमी और सुख-दुःखादि में तथा मान और अपमान में जिसके अन्तःकरण की वृत्तियाँ भलीभाँति शांत हैं, ऐसे स्वाधीन आत्मावाले पुरुष के ज्ञान में सच्चिदानन्दघन परमात्मा सम्यक्‌ प्रकार से स्थित है अर्थात उसके ज्ञान में परमात्मा के सिवा अन्य कुछ है ही नहीं

 ॥7॥


~ श्लोक 7 - अध्याय 6 - ध्यानयोग

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