रविवार, 14 फ़रवरी 2021

श्रीमद्भागवत गीता

तत्रैकाग्रं मनः कृत्वा यतचित्तेन्द्रियक्रियः।
 उपविश्यासने युञ्ज्याद्योगमात्मविशुद्धये॥

उस आसन पर बैठकर चित्त और इन्द्रियों की क्रियाओं को वश में रखते हुए मन को एकाग्र करके अन्तःकरण की शुद्धि के लिए योग का अभ्यास करे
 ॥12॥

~ श्लोक 12 - अध्याय 6 - ध्यानयोग

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