रविवार, 28 फ़रवरी 2021

श्रीमद्भागवत गीता

यतो यतो निश्चरति मनश्चञ्चलमस्थिरम्‌।
 ततस्ततो नियम्यैतदात्मन्येव वशं नयेत्‌॥

यह स्थिर न रहने वाला और चंचल मन जिस-जिस शब्दादि विषय के निमित्त से संसार में विचरता है, उस-उस विषय से रोककर यानी हटाकर इसे बार-बार परमात्मा में ही निरुद्ध करे
 ॥26॥

~ श्लोक 26 - अध्याय 6 - ध्यानयोग

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