शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2021

श्रीमद्भागवत गीता

सङ्‍कल्पप्रभवान्कामांस्त्यक्त्वा सर्वानशेषतः।
 मनसैवेन्द्रियग्रामं विनियम्य समन्ततः॥

संकल्प से उत्पन्न होने वाली सम्पूर्ण कामनाओं को निःशेष रूप से त्यागकर और मन द्वारा इन्द्रियों के समुदाय को सभी ओर से भलीभाँति रोककर
 ॥24॥

~ श्लोक 24 - अध्याय 6 - ध्यानयोग

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