गुरुवार, 4 फ़रवरी 2021

श्रीमद्भागवत गीता

( आत्म-उद्धार के लिए प्रेरणा और भगवत्प्राप्त पुरुष के लक्षण ) 
 उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्‌।
 आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥

अपने द्वारा अपना संसार-समुद्र से उद्धार करे और अपने को अधोगति में न डाले क्योंकि यह मनुष्य आप ही तो अपना मित्र है और आप ही अपना शत्रु है
 ॥5॥

~ श्लोक 5 - अध्याय 6 - ध्यानयोग

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