रविवार, 21 फ़रवरी 2021

श्रीमद्भागवत गीता

यदा विनियतं चित्तमात्मन्येवावतिष्ठते।
 निःस्पृहः सर्वकामेभ्यो युक्त इत्युच्यते तदा॥

अत्यन्त वश में किया हुआ चित्त जिस काल में परमात्मा में ही भलीभाँति स्थित हो जाता है, उस काल में सम्पूर्ण भोगों से स्पृहारहित पुरुष योगयुक्त है, ऐसा कहा जाता है
 ॥18॥

~ श्लोक 18 - अध्याय 6 - ध्यानयोग

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