मंगलवार, 16 फ़रवरी 2021

श्रीमद्भागवत गीता

प्रशान्तात्मा विगतभीर्ब्रह्मचारिव्रते स्थितः।
 मनः संयम्य मच्चित्तो युक्त आसीत मत्परः॥

ब्रह्मचारी के व्रत में स्थित, भयरहित तथा भलीभाँति शांत अन्तःकरण वाला सावधान योगी मन को रोककर मुझमें चित्तवाला और मेरे परायण होकर स्थित होए
 ॥14॥

~ श्लोक 14 - अध्याय 6 - ध्यानयोग

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