शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2021

श्रीमद्भागवत गीता

( विस्तार से ध्यान योग का विषय ) 
 शुचौ देशे प्रतिष्ठाप्य स्थिरमासनमात्मनः।
 नात्युच्छ्रितं नातिनीचं चैलाजिनकुशोत्तरम्‌॥

शुद्ध भूमि में, जिसके ऊपर क्रमशः कुशा, मृगछाला और वस्त्र बिछे हैं, जो न बहुत ऊँचा है और न बहुत नीचा, ऐसे अपने आसन को स्थिर स्थापन करके
 ॥11॥

~ श्लोक 11 - अध्याय 6 - ध्यानयोग

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