शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2020

श्रीमद्भागवत गीता

यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु कर्मण्यतन्द्रितः।
 मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः॥

क्योंकि हे पार्थ! यदि कदाचित्‌ मैं सावधान होकर कर्मों में न बरतूँ तो बड़ी हानि हो जाए क्योंकि मनुष्य सब प्रकार से मेरे ही मार्ग का अनुसरण करते हैं
 ॥23॥

~ श्लोक 23 - अध्याय 3 - कर्मयोग

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