रविवार, 25 अक्टूबर 2020

श्रीमद्भागवत गीता

धूमेनाव्रियते वह्निर्यथादर्शो मलेन च।
 यथोल्बेनावृतो गर्भस्तथा तेनेदमावृतम्‌॥

जिस प्रकार धुएँ से अग्नि और मैल से दर्पण ढँका जाता है तथा जिस प्रकार जेर से गर्भ ढँका रहता है, वैसे ही उस काम द्वारा यह ज्ञान ढँका रहता है
 ॥38॥

~ श्लोक 38 - अध्याय 3 - कर्मयोग

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