मंगलवार, 27 अक्टूबर 2020

श्रीमद्भागवत गीता

इन्द्रियाणि मनो बुद्धिरस्याधिष्ठानमुच्यते।
 एतैर्विमोहयत्येष ज्ञानमावृत्य देहिनम्‌॥

इन्द्रियाँ, मन और बुद्धि- ये सब इसके वासस्थान कहे जाते हैं। यह काम इन मन, बुद्धि और इन्द्रियों द्वारा ही ज्ञान को आच्छादित करके जीवात्मा को मोहित करता है।
 ॥40॥

~ श्लोक 40 - अध्याय 3 - कर्मयोग

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें