रविवार, 18 अक्टूबर 2020

श्रीमद्भागवत गीता

ये मे मतमिदं नित्यमनुतिष्ठन्ति मानवाः।
 श्रद्धावन्तोऽनसूयन्तो मुच्यन्ते तेऽति कर्मभिः॥

जो कोई मनुष्य दोषदृष्टि से रहित और श्रद्धायुक्त होकर मेरे इस मत का सदा अनुसरण करते हैं, वे भी सम्पूर्ण कर्मों से छूट जाते हैं
 ॥31॥

~ श्लोक 31 - अध्याय 3 - कर्मयोग

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