सोमवार, 26 अक्टूबर 2020

श्रीमद्भागवत गीता

आवृतं ज्ञानमेतेन ज्ञानिनो नित्यवैरिणा।
 कामरूपेण कौन्तेय दुष्पूरेणानलेन च॥

और हे अर्जुन! इस अग्नि के समान कभी न पूर्ण होने वाले काम रूप ज्ञानियों के नित्य वैरी द्वारा मनुष्य का ज्ञान ढँका हुआ है
 ॥39॥

~ श्लोक 39 - अध्याय 3 - कर्मयोग

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