शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2020

श्रीमद्भागवत गीता

एवं बुद्धेः परं बुद्धवा संस्तभ्यात्मानमात्मना।
 जहि शत्रुं महाबाहो कामरूपं दुरासदम्‌॥

इस प्रकार बुद्धि से पर अर्थात सूक्ष्म, बलवान और अत्यन्त श्रेष्ठ आत्मा को जानकर और बुद्धि द्वारा मन को वश में करके हे महाबाहो! तू इस कामरूप दुर्जय शत्रु को मार डाल
 ॥43॥ 
 ॐ तत्सदिति श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे कर्मयोगो नाम तृतीयोऽध्यायः
 ॥3॥

~ श्लोक 43 - अध्याय 3 - कर्मयोग

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