शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2020

श्रीमद्भागवत गीता

( काम के निरोध का विषय ) अर्जुन उवाचः अथ केन प्रयुक्तोऽयं पापं चरति पुरुषः।

 अनिच्छन्नपि वार्ष्णेय बलादिव नियोजितः॥


अर्जुन बोले- हे कृष्ण! तो फिर यह मनुष्य स्वयं न चाहता हुआ भी बलात्‌ लगाए हुए की भाँति किससे प्रेरित होकर पाप का आचरण करता है

 ॥36॥॥

~ श्लोक 36 - अध्याय 3 - कर्मयोग

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