शनिवार, 10 अक्टूबर 2020

श्रीमद्भागवत गीता

यदि उत्सीदेयुरिमे लोका न कुर्यां कर्म चेदहम्‌।
 संकरस्य च कर्ता स्यामुपहन्यामिमाः प्रजाः॥

इसलिए यदि मैं कर्म न करूँ तो ये सब मनुष्य नष्ट-भ्रष्ट हो जाएँ और मैं संकरता का करने वाला होऊँ तथा इस समस्त प्रजा को नष्ट करने वाला बनूँ
 ॥24॥

~ श्लोक 24 - अध्याय 3 - कर्मयोग

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