रविवार, 9 फ़रवरी 2020

श्रीमद्भागवत गीता।

संकरो नरकायैव कुलघ्नानां कुलस्य च।
 पतन्ति पितरो ह्येषां लुप्तपिण्डोदकक्रियाः॥

वर्णसंकर कुलघातियों को और कुल को नरक में ले जाने के लिए ही होता है। लुप्त हुई पिण्ड और जल की क्रिया वाले अर्थात श्राद्ध और तर्पण से वंचित इनके पितर लोग भी अधोगति को प्राप्त होते हैं
 ॥42॥

~ श्लोक 42 - अध्याय 1

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