शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2020

श्रीमद्भागवत गीता।

संजय उवाच
 एवमुक्त्वार्जुनः सङ्‍ख्ये रथोपस्थ उपाविशत्‌।
 विसृज्य सशरं चापं शोकसंविग्नमानसः॥

संजय बोले- रणभूमि में शोक से उद्विग्न मन वाले अर्जुन इस प्रकार कहकर, बाणसहित धनुष को त्यागकर रथ के पिछले भाग में बैठ गए
 ॥47॥
ॐ तत्सदिति श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादेऽर्जुनविषादयोगो नाम प्रथमोऽध्यायः। 
 ॥1॥

~ श्लोक 47 - अध्याय 1

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