गुरुवार, 6 फ़रवरी 2020

श्रीमद्भागवत गीता

कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्माः सनातनाः।
 धर्मे नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत॥

कुल के नाश से सनातन कुल-धर्म नष्ट हो जाते हैं तथा धर्म का नाश हो जाने पर सम्पूर्ण कुल में पाप भी बहुत फैल जाता है
 ॥40॥

~ श्लोक 40 - अध्याय 1

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें