मंगलवार, 18 फ़रवरी 2020

श्रीमद्भागवत गीता

अर्जुन उवाच
 कथं भीष्ममहं सङ्‍ख्ये द्रोणं च मधुसूदन।
 इषुभिः प्रतियोत्स्यामि पूजार्हावरिसूदन॥

अर्जुन बोले- हे मधुसूदन! मैं रणभूमि में किस प्रकार बाणों से भीष्म पितामह और द्रोणाचार्य के विरुद्ध लड़ूँगा? क्योंकि हे अरिसूदन! वे दोनों ही पूजनीय हैं
 ॥4॥

~ श्लोक 4 - अध्याय 2 

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