सोमवार, 3 फ़रवरी 2020

श्रीमद्भागवत गीता

निहत्य धार्तराष्ट्रान्न का प्रीतिः स्याज्जनार्दन।
 पापमेवाश्रयेदस्मान्‌ हत्वैतानाततायिनः॥

हे जनार्दन! धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारकर हमें क्या प्रसन्नता होगी? इन आततायियों को मारकर तो हमें पाप ही लगेगा
 ॥36॥

~ श्लोक 36 - अध्याय 1

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