सोमवार, 17 फ़रवरी 2020

श्रीमद्भागवत गीता

क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते।
 क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप॥

इसलिए हे अर्जुन! नपुंसकता को मत प्राप्त हो, तुझमें यह उचित नहीं जान पड़ती। हे परंतप! हृदय की तुच्छ दुर्बलता को त्यागकर युद्ध के लिए खड़ा हो जा
 ॥3॥

~ श्लोक 3 - अध्याय 2 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें