सोमवार, 10 फ़रवरी 2020

श्रीमद्भागवत गीता

दोषैरेतैः कुलघ्नानां वर्णसंकरकारकैः।
 उत्साद्यन्ते जातिधर्माः कुलधर्माश्च शाश्वताः॥

इन वर्णसंकरकारक दोषों से कुलघातियों के सनातन कुल-धर्म और जाति-धर्म नष्ट हो जाते हैं
 ॥43॥

~ श्लोक 43 - अध्याय 1

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