शुक्रवार, 1 जनवरी 2021

श्रीमद्भागवत गीता

यत्साङ्‍ख्यैः प्राप्यते स्थानं तद्यौगैरपि गम्यते।
 एकं साङ्‍ख्यं च योगं च यः पश्यति स पश्यति॥

ज्ञान योगियों द्वारा जो परमधाम प्राप्त किया जाता है, कर्मयोगियों द्वारा भी वही प्राप्त किया जाता है। इसलिए जो पुरुष ज्ञानयोग और कर्मयोग को फलरूप में एक देखता है, वही यथार्थ देखता है
 ॥5॥

~ श्लोक 5 - अध्याय 5 - कर्मयोग-कृष्णभावनाभावित कर्म

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