रविवार, 10 जनवरी 2021

श्रीमद्भागवत गीता

न कर्तृत्वं न कर्माणि लोकस्य सृजति प्रभुः।
 न कर्मफलसंयोगं स्वभावस्तु प्रवर्तते।

परमेश्वर मनुष्यों के न तो कर्तापन की, न कर्मों की और न कर्मफल के संयोग की रचना करते हैं, किन्तु स्वभाव ही बर्त रहा है
 ॥14॥

~ श्लोक 14 - अध्याय 5 - कर्मयोग-कृष्णभावनाभावित कर्म

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