बुधवार, 27 जनवरी 2021

श्रीमद्भागवत गीता

कामक्रोधवियुक्तानां यतीनां यतचेतसाम्‌।
 अभितो ब्रह्मनिर्वाणं वर्तते विदितात्मनाम्‌॥

काम-क्रोध से रहित, जीते हुए चित्तवाले, परब्रह्म परमात्मा का साक्षात्कार किए हुए ज्ञानी पुरुषों के लिए सब ओर से शांत परब्रह्म परमात्मा ही परिपूर्ण है
 ॥26॥

~ श्लोक 26 - अध्याय 5 - कर्मयोग-कृष्णभावनाभावित कर्म

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