गुरुवार, 7 जनवरी 2021

श्रीमद्भागवत गीता

युक्तः कर्मफलं त्यक्त्वा शान्तिमाप्नोति नैष्ठिकीम्‌।
 अयुक्तः कामकारेण फले सक्तो निबध्यते॥

कर्मयोगी कर्मों के फल का त्याग करके भगवत्प्राप्ति रूप शान्ति को प्राप्त होता है और सकामपुरुष कामना की प्रेरणा से फल में आसक्त होकर बँधता है
 ॥12॥

~ श्लोक 12 - अध्याय 5 - कर्मयोग-कृष्णभावनाभावित कर्म

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