बुधवार, 17 मार्च 2021

श्रीमद्भागवत गीता

एतन्मे संशयं कृष्ण छेत्तुमर्हस्यशेषतः।
 त्वदन्यः संशयस्यास्य छेत्ता न ह्युपपद्यते॥

हे श्रीकृष्ण! मेरे इस संशय को सम्पूर्ण रूप से छेदन करने के लिए आप ही योग्य हैं क्योंकि आपके सिवा दूसरा इस संशय का छेदन करने वाला मिलना संभव नहीं है
 ॥39॥

~ श्लोक 39 - अध्याय 6 - ध्यानयोग

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