शनिवार, 4 जुलाई 2020

श्रीमद्भागवत गीता

अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च।
 नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः॥

क्योंकि यह आत्मा अच्छेद्य है, यह आत्मा अदाह्य, अक्लेद्य और निःसंदेह अशोष्य है तथा यह आत्मा नित्य, सर्वव्यापी, अचल, स्थिर रहने वाला और सनातन है
 ॥24॥

~ श्लोक 24 - अध्याय 2

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