शुक्रवार, 24 जुलाई 2020

श्रीमद्भागवत गीता

सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ।
 ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि॥

जय-पराजय, लाभ-हानि और सुख-दुख को समान समझकर, उसके बाद युद्ध के लिए तैयार हो जा, इस प्रकार युद्ध करने से तू पाप को नहीं प्राप्त होगा
 ॥38॥

~ श्लोक 38 - अध्याय 2 - गीता का सार

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