शुक्रवार, 17 जुलाई 2020

श्रीमद्भागवत गीता

यदृच्छया चोपपन्नां स्वर्गद्वारमपावृतम्‌।
 सुखिनः क्षत्रियाः पार्थ लभन्ते युद्धमीदृशम्‌॥

हे पार्थ! अपने-आप प्राप्त हुए और खुले हुए स्वर्ग के द्वार रूप इस प्रकार के युद्ध को भाग्यवान क्षत्रिय लोग ही पाते हैं
 ॥32॥

~ श्लोक 32 - अध्याय 2 - गीता का सार

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