शनिवार, 7 मार्च 2020

Shrimadbhagavat Gita

य एनं वेत्ति हन्तारं यश्चैनं मन्यते हतम्‌।
 उभौ तौ न विजानीतो नायं हन्ति न हन्यते॥

जो इस आत्मा को मारने वाला समझता है तथा जो इसको मरा मानता है, वे दोनों ही नहीं जानते क्योंकि यह आत्मा वास्तव में न तो किसी को मारता है और न किसी द्वारा मारा जाता है
 ॥19॥

~ श्लोक 19 - अध्याय 2 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें