शनिवार, 28 मार्च 2020

श्रीमद्भागवत गीता

अकीर्तिं चापि भूतानि
 कथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम्‌।
 सम्भावितस्य चाकीर्ति-
 र्मरणादतिरिच्यते॥

तथा सब लोग तेरी बहुत काल तक रहने वाली अपकीर्ति का भी कथन करेंगे और माननीय पुरुष के लिए अपकीर्ति मरण से भी बढ़कर है
 ॥34॥

~ श्लोक 34 - अध्याय 2 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें