शनिवार, 14 मार्च 2020

श्रीमद्भागवत गीता

अथ चैनं नित्यजातं नित्यं वा मन्यसे मृतम्‌।
 तथापि त्वं महाबाहो नैवं शोचितुमर्हसि॥

किन्तु यदि तू इस आत्मा को सदा जन्मने वाला तथा सदा मरने वाला मानता हो, तो भी हे महाबाहो! तू इस प्रकार शोक करने योग्य नहीं है
 ॥26॥

~ श्लोक 26 - अध्याय 2

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