बुधवार, 23 दिसंबर 2020

श्रीमद्भागवत गीता

( सांख्ययोग और कर्मयोग का निर्णय ) 
 अर्जुन उवाच
 सन्न्यासं कर्मणां कृष्ण पुनर्योगं च शंससि।
 यच्छ्रेय एतयोरेकं तन्मे ब्रूहि सुनिश्चितम्‌॥

अर्जुन बोले- हे कृष्ण! आप कर्मों के संन्यास की और फिर कर्मयोग की प्रशंसा करते हैं। इसलिए इन दोनों में से जो एक मेरे लिए भलीभाँति निश्चित कल्याणकारक साधन हो, उसको कहिए
 ॥1॥

~ श्लोक 1 - अध्याय 5 - कर्मयोग-कृष्णभावनाभावित कर्म

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें