गुरुवार, 10 दिसंबर 2020

श्रीमद्भागवत गीता

( ज्ञान की महिमा ) श्रेयान्द्रव्यमयाद्यज्ञाज्ज्ञानयज्ञः परन्तप।
 सर्वं कर्माखिलं पार्थ ज्ञाने परिसमाप्यते॥

हे परंतप अर्जुन! द्रव्यमय यज्ञ की अपेक्षा ज्ञान यज्ञ अत्यन्त श्रेष्ठ है तथा यावन्मात्र सम्पूर्ण कर्म ज्ञान में समाप्त हो जाते हैं
 ॥33॥

~ श्लोक 33 - अध्याय 4 - दिव्य ज्ञान

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