सोमवार, 31 अगस्त 2020

श्रीमद्भागवत गीता

तस्माद्यस्य महाबाहो निगृहीतानि सर्वशः।
 इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता॥

इसलिए हे महाबाहो! जिस पुरुष की इन्द्रियाँ इन्द्रियों के विषयों में सब प्रकार निग्रह की हुई हैं, उसी की बुद्धि स्थिर है
 ॥68॥

~ श्लोक 68 - अध्याय 2 - गीता का सार

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें