शुक्रवार, 11 सितंबर 2020

श्रीमद्भागवत गीता

व्यामिश्रेणेव वाक्येन बुद्धिं मोहयसीव मे।
 तदेकं वद निश्चित्य येन श्रेयोऽहमाप्नुयाम्‌॥

आप मिले हुए-से वचनों से मेरी बुद्धि को मानो मोहित कर रहे हैं। इसलिए उस एक बात को निश्चित करके कहिए जिससे मैं कल्याण को प्राप्त हो जाऊँ
 ॥2॥॥

~ श्लोक 2 - अध्याय 3 - कर्मयोग

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