गुरुवार, 10 सितंबर 2020

श्रीमद्भागवत गीता

(ज्ञानयोग और कर्मयोग के अनुसार अनासक्त भाव से नियत कर्म करने की श्रेष्ठता का निरूपण) अर्जुन उवाच ज्यायसी चेत्कर्मणस्ते मता बुद्धिर्जनार्दन।
 तत्किं कर्मणि घोरे मां नियोजयसि केशव॥

अर्जुन बोले- हे जनार्दन! यदि आपको कर्म की अपेक्षा ज्ञान श्रेष्ठ मान्य है तो फिर हे केशव! मुझे भयंकर कर्म में क्यों लगाते हैं?
 ॥1॥

~ श्लोक 1 - अध्याय 3 - कर्मयोग

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