रविवार, 28 जून 2020

श्रीमद्भगवद्गीता

न जायते म्रियते वा कदाचि-
 न्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः।
 अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो-
 न हन्यते हन्यमाने शरीरे॥

यह आत्मा किसी काल में भी न तो जन्मता है और न मरता ही है तथा न यह उत्पन्न होकर फिर होने वाला ही है क्योंकि यह अजन्मा, नित्य, सनातन और पुरातन है, शरीर के मारे जाने पर भी यह नहीं मारा जाता
 ॥20॥

~ श्लोक 20 - अध्याय 2 

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