शुक्रवार, 26 जून 2020

श्रीमद्भागवत गीता

अन्तवन्त इमे देहा नित्यस्योक्ताः शरीरिणः।
 अनाशिनोऽप्रमेयस्य तस्माद्युध्यस्व भारत॥

इस नाशरहित, अप्रमेय, नित्यस्वरूप जीवात्मा के ये सब शरीर नाशवान कहे गए हैं, इसलिए हे भरतवंशी अर्जुन! तू युद्ध कर
 ॥18॥

~ श्लोक 18 - अध्याय 2 - गीता का सार

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