मंगलवार, 26 मई 2020

श्रीमद्भागवत गीता

विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः।
 निर्ममो निरहंकारः स शान्तिमधिगच्छति॥

जो पुरुष सम्पूर्ण कामनाओं को त्याग कर ममतारहित, अहंकाररहित और स्पृहारहित हुआ विचरता है, वही शांति को प्राप्त होता है अर्थात वह शान्ति को प्राप्त है
 ॥71॥

~ श्लोक 71 - अध्याय 2 

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