मंगलवार, 12 मई 2020

श्रीमद्भागवत गीता

ध्यायतो विषयान्पुंसः संगस्तेषूपजायते।
 संगात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥

विषयों का चिन्तन करने वाले पुरुष की उन विषयों में आसक्ति हो जाती है, आसक्ति से उन विषयों की कामना उत्पन्न होती है और कामना में विघ्न पड़ने से क्रोध उत्पन्न होता है
 ॥62॥

~ श्लोक 62 - अध्याय 2

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